Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024

आज बिहार को अलग राज्य बने हुए 112 Years हो चुके है। इसलिए आज हम “Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024” का पूरा अध्ययन करेंगे। राजनितिक दृष्टिकोण से भी “Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024” करना जरुरी है।

Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024
Image Source : Wikimedia Commons

बिहार पुरातन समय से ही एक शक्तिशाली राज्य था, लेकिन आज इसकी हालत इतनी बुरी हो गयी है कि यहाँ के शिक्षित युवा मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्यों में जा रहे है। चाचा भतीजे की जोड़ी या सच कहिये तो बिहार के लोगों के अंदर गहराई में बैठा जातिवाद ने बिहार को बर्बाद किया है। एक और कारण हो सकता है कि बिहार के प्रत्येक व्यक्ति के अंदर प्रेत की तरह सिमटा राजनितिक महत्वाकांक्षा की जिजीविषा ने भी बिहार को गर्त में डालने में अहम भूमिका निभाई है।

इसलिए हम आज Bihar Diwas 2024 पर “Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024” के एक लेख के माध्यम से इसका ऑडिट कर रहे है।


Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024 : क्या राजनितिक महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ा बिहार

बिहार के लोगो में एक बहुत पुराणी आदत है, वह है सबको मुख्यमंत्री बनने का। आप बिहार के किसी भी घर में चले जाइए, आपको हर घर में कोई ना कोई एक लड़का जरूर मिलेगा, जो खुद को यही समझता है कि वह मुख्यमंत्री और प्रधामंत्री बनने के लिए जन्म लिया है। इसलिए वह इससे निचे कुछ भी करने को तैयार नहीं होता है।

इतना ही नहीं आप दूसरे राज्यों के तुलना में देख लीजिये, बिहार का कोई भी सरकारी कर्मी रिटायरमेंट के बाद उसके दिमाग में सिर्फ नेता बनने की ही इच्छा रही है। जैसे अगर कोई आईएएस या आईपीएस रैंक से रिटायर करता है तो वह सांसद और विधायिकी में अपना भाग्य आजमाने निकल जाता है। ऐसे ही कोई बी श्रेणी के अधिकारी से रिटायर करता है तो वह जिला परिषद्, किसान यूनियन, मजदूर यूनियन में अपना भाग्य आजमाने लगता है।

इसमें जो सी और डी श्रेणी के व्यक्ति रिटायर कर अपने गांव या मोहल्ले में मुखिया, सरपंच, वार्ड का चुनाव लड़ने और राजनीती करने में लग जाता है। यही हाल बिज़नेस क्लास के लोगो का भी है। हम बिहार में यही देखते है कि बिज़नेस लोग बिहार में पैसे कमाने के लिए नहीं करते है, बल्कि पैसा इसलिए कमाते है कि वह आगे पैसे से राजनीती वर्चस्व बनाएंगे।

Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024 : क्या जातीय संघर्ष की भेंट चढ़ा बिहार

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बिहार जातीय संघर्ष कोई आज नया नहीं है। बिहार में जातीय संघर्ष की शुरुआत अग्रेजों के समय आज से करीब 150 साल पहले हुआ था। अंग्रेजो ने इसे स्वंतंत्रता आंदोलनों को कमजोर करने के लिए बढ़ावा दिया था। लेकिन अभी इस जातीय संघर्ष को सबसे अधिक बढ़ाने वाले लालू प्रसाद यादव है। लालू प्रसाद यादव मुख्यमत्री बने रहने के लिए बिहार में जगह जगह जातीय हिंसा करवाया।

इन जातीय हिंसा के घटनावों में भयंकर नरसंहार हुए है। जैसे बिहार का चर्चित सेनारी नरसंहार, बाथेपुर नरसंहार , बारा नरसंहार तो पुरे विश्व में चर्चित है। इन जातीय नरसंहार के समय बिहार में लालू यादव की सरकार थी। जो एम् वाई समीकरण से चलती थी। इसी समय रणवीर सेना और एमसीसी के बीच लड़ाई चलती रहती थी।

पता नहीं आपको यद् होगा की मुझे तो पूरी तरह याद है, बिहार में आज से तीस साल पहले हर जिले तीन चार फैक्ट्रिया होती थी, और तो और चीनी मिले भी जगह जगह पर मिल जाती थी, आज अगर आप देखिये तो 80 चीनी मिलें जातीय संघर्ष में बंद हो चुके है। इसलिए हम तो कहेंगे बिहार को बर्बाद करने में यह पिछले 30 साल नीतीश और लालू को जोड़ी का भी अहम योगदान रहा है।

“Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024″ : क्या आगे बिहार में होगा सुधार

अगर आप बिहार के इतिहास में देखिएगा तो पाइयेगा की यह वही बिहार में जिसमे पुरे अखंड भारत को अपने नियंत्रण में रखने की क्षमता थी, चाहे वह सैन्य क्षमता हो या आर्थिक क्षमता या राजनैतिक क्षमता हो। बिहार सबमे अग्रणी था। आप चाणक्य के समय के बिहार को याद कीजिये, आप देखेंगे कि यवनों के आक्रमण के समय सिर्फ एक बिहार (मगध ) ही ऐसा राज्य था। जिसमें पुरे भारत को अपने सैन्य बल से अपने नियंत्रण में लेकर बाहरी शत्रुओ से रक्षा भी कर सकता था।

आज इसी सोच को लेकर बिहार के चर्चित आईपीएस विकास वैभव ने “lets Inspire Bihar ” बनाया हैं। चर्चित IPS Vikash Vaibhaw कहते है कि जब आज से हजार साल पहले हमारे इतना शक्तिशाली था तो आज फिर क्यों नहीं हो सकता है। सिर्फ जरुरत है एक सच्चे मार्गदर्शक की, जरुरत है सिर्फ जातिवाद ऊपर उठने की।

आज इसी सोच को लेकर बिहार के चर्चित आईपीएस विकास वैभव ने “lets Inspire Bihar ” बनाया हैं। चर्चित IPS Vikash Vaibhaw कहते है कि जब आज से हजार साल पहले हमारे इतना शक्तिशाली था तो आज फिर क्यों नहीं हो सकता है। सिर्फ जरुरत है एक सच्चे मार्गदर्शक की, जरुरत है सिर्फ जातिवाद ऊपर उठने की।

इसलिए आज हम लोग भी “Audit of 112 years of Bihar on Bihar Diwas 2024″ पढ़ने के बाद यह संकल्प ले कि IPS Vikash Vaibhaw के आंदोलन “lets Inspire Bihar ” और चाणक्य से प्रेरणा लेकर, Bihar Diwas 2024 के अवसर पर वैसे ही बनायेंगे जैसे आज से हजार पहले हमारा बिहार था।

Abhishek Kumar is the editor of Nutan Charcha News. Who has been working continuously in journalism for the last many years? Abhishek Kumar has worked in Doordarshan News, Radio TV News and Akash Vani Patna. I am currently publishing my news magazine since 2004 which is internationally famous in the field of politics.


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